सैन फ्रांसिस्को, 1981। ये कहानी है क्रिस गार्डनर नाम के एक आम आदमी की। क्रिस एक सेल्समैन है। वो 'बोन डेंसिटी स्कैनर' नाम की एक मशीन बेचता है – जो एक्स-रे से थोड़ी बेहतर तो है, लेकिन डॉक्टर्स के लिए बेकार है क्योंकि ये बहुत महंगी है।
उसे इंटर्नशिप मिल जाती है। लेकिन बिना पैसे के।
वो दौड़ता हुआ डे-केयर सेंटर पहुँचता है। सी.जे. को गोद में उठाता है और कस कर गले लगाता है।
वे हर रात ग्लाइड मेमोरियल चर्च (एक बेघर शेल्टर) में लाइन में लगते हैं। एक रात, लाइन में खड़े-खड़े, सी.जे. अचानक कहता है, "पापा, सुनो।" चर्च के अंदर से एक गाना आता है – "लॉर्ड, डोंट मूव दैट माउंटेन..." (हे भगवान, उस पहाड़ को हटाना मत, बस मुझे चढ़ने की ताकत दे दो।)
कहानी यहाँ खत्म नहीं होती। वो क्रिस गार्डनर आगे चलकर अपनी खुद की मल्टीमिलियन डॉलर की फर्म के मालिक बनता है। लेकिन फिल्म का असली संदेश है – खुशी कोई जगह नहीं है, खुशी एक रास्ता है। वो रास्ता जहाँ तुम रोते हुए भी मुस्कुराते हो, भूखे रहकर भी सीखते हो, और टॉयलेट में रात बिताकर भी सुबह अपने बच्चे से कहते हो:
क्रिस और सी.जे. अब सड़कों पर हैं। वे मोटल का किराया नहीं दे पाते। सामान बाहर फेंक दिया जाता है। क्रिस अपने बेटे को गोद में उठाकर BART स्टेशन के टॉयलेट में रात बिताने को मजबूर होता है।
और इसी छोटे से डायलॉग में छिपी है – की असली हिंदी। ✨
सैन फ्रांसिस्को, 1981। ये कहानी है क्रिस गार्डनर नाम के एक आम आदमी की। क्रिस एक सेल्समैन है। वो 'बोन डेंसिटी स्कैनर' नाम की एक मशीन बेचता है – जो एक्स-रे से थोड़ी बेहतर तो है, लेकिन डॉक्टर्स के लिए बेकार है क्योंकि ये बहुत महंगी है।
उसे इंटर्नशिप मिल जाती है। लेकिन बिना पैसे के।
वो दौड़ता हुआ डे-केयर सेंटर पहुँचता है। सी.जे. को गोद में उठाता है और कस कर गले लगाता है।
वे हर रात ग्लाइड मेमोरियल चर्च (एक बेघर शेल्टर) में लाइन में लगते हैं। एक रात, लाइन में खड़े-खड़े, सी.जे. अचानक कहता है, "पापा, सुनो।" चर्च के अंदर से एक गाना आता है – "लॉर्ड, डोंट मूव दैट माउंटेन..." (हे भगवान, उस पहाड़ को हटाना मत, बस मुझे चढ़ने की ताकत दे दो।)
कहानी यहाँ खत्म नहीं होती। वो क्रिस गार्डनर आगे चलकर अपनी खुद की मल्टीमिलियन डॉलर की फर्म के मालिक बनता है। लेकिन फिल्म का असली संदेश है – खुशी कोई जगह नहीं है, खुशी एक रास्ता है। वो रास्ता जहाँ तुम रोते हुए भी मुस्कुराते हो, भूखे रहकर भी सीखते हो, और टॉयलेट में रात बिताकर भी सुबह अपने बच्चे से कहते हो:
क्रिस और सी.जे. अब सड़कों पर हैं। वे मोटल का किराया नहीं दे पाते। सामान बाहर फेंक दिया जाता है। क्रिस अपने बेटे को गोद में उठाकर BART स्टेशन के टॉयलेट में रात बिताने को मजबूर होता है।
और इसी छोटे से डायलॉग में छिपी है – की असली हिंदी। ✨